अथातो भ‍‍क्‍ति जिज्ञासा – Athato Bhakti Jigyasa, Vol.1

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शांडिल्य के भक्ति-सूत्रों पर प्रश्नोत्तर सहित हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा पुणे में दिए गए 40 प्रवचनों में से 20 (01 से 20) प्रवचनों का संग्रह
शांडिल्य के भक्ति-सूत्रों पर प्रश्नोत्तर सहित हुई प्रवचनमाला के अंतर्गत ओशो द्वारा पुणे में दिए गए 40 प्रवचनों में से 20 (01 से 20) प्रवचनों का संग्रह

यह सुबह, यह वृक्षों में शांति, पक्षियों की चहचहाहट...या कि हवाओं का वृक्षों से गुजरना, पहाड़ों का सन्नाटा...या कि नदियों का पहाड़ों से उतरना...या सागरों में लहरों की हलचल, नाद...या आकाश में बादलों की गड़गड़ाहट--यह सभी ओंकार है।

ओंकार का अर्थ है: सार-ध्वनि; समस्त ध्वनियों का सार। ओंकार कोई मंत्र नहीं, सभी छंदों में छिपी हुई आत्मा का नाम है। जहां भी गीत है, वहां ओंकार है। जहां भी वाणी है, वहां ओंकार है। जहां भी ध्वनि है, वहां ओंकार है।

और यह सारा जगत ध्वनियों से भरा है। इस जगत की उत्पत्ति ध्वनि में है। इस जगत का जीवन ध्वनि में है; और इस जगत का विसर्जन भी ध्वनि में है। ओम से सब पैदा हुआ, ओम में सब जीता, ओम में सब एक दिन लीन हो जाता है। जो प्रारंभ है, वही अंत है। और जो प्रारंभ है और अंत है, वही मध्य भी है। मध्य अन्यथा कैसे होगा! इंजील कहती है: प्रारंभ में ईश्वर था, और ईश्वर शब्द के साथ था, और ईश्वर शब्द था, और फिर उसी शब्द से सब निष्पन्न हुआ।

वह ओंकार की ही चर्चा है। मैं बोलूं तो ओंकार है। तुम सुनो तो ओंकार है। हम मौन बैठें तो ओंकार है। जहां लयबद्धता है, वहीं ओंकार है। सन्नाटे में भी--स्मरण रखना--जहां कोई नाद नहीं पैदा होता, वहां भी छुपा हुआ नाद है--मौन का संगीत! शून्य का संगीत! जब तुम चुप हो, तब भी तो एक गीत झर-झर बहता है। जब वाणी निर्मित नहीं होती, तब भी तो सूक्ष्म में छंद बंधता है। अप्रकट है, अव्यक्त है; पर है तो सही। तो शून्य में भी और शब्द में भी ओंकार निमज्जित है।

ओंकार ऐसा है जैसे सागर। हम ऐसे हैं जैसे सागर की मछली।

इस ओंकार को समझना। इस ओंकार को ठीक से समझा नहीं गया है। लोग तो समझे कि एक मंत्र है, दोहरा लिया। यह दोहराने की बात नहीं है। यह तो तुम्हारे भीतर जब छंदोबद्धता पैदा हो, तभी तुम समझोगे ओंकार क्या है। हिंदू होने से नहीं समझोगे। वेदपाठी होने से नहीं समझोगे। पूजा का थाल सजा कर ओंकार की रटन करने से नहीं समझोगे। जब तुम्हारे जीवन में उत्सव होगा, तब समझोगे। जब तुम्हारे जीवन में गान फूटेगा, तब समझोगे। जब तुम्हारे भीतर झरने बहेंगे, तब समझोगे। ओम से शुरुआत अदभुत है।
—ओशो

इस पुस्तक में ओशो निम्नलिखित विषयों पर बोले हैं:
जीवन, स्नेह, प्रेम, श्रद्धा, भक्ति, विरह, अद्वैत, मौन, अलोभ, सरलता

अधिक जानकारी
Type फुल सीरीज
Publisher ओशो मीडिया इंटरनैशनल
ISBN-13 978-0-88050-895-7
Format Adobe ePub